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52 Ayahs • Meccan
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ نٓ ۚ وَٱلْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ
नून क़लम की और उस चीज़ की जो लिखती हैं (उसकी) क़सम है
مَآ أَنتَ بِنِعْمَةِ رَبِّكَ بِمَجْنُونٍۢ
कि तुम अपने परवरदिगार के फ़ज़ल (व करम) से दीवाने नहीं हो
وَإِنَّ لَكَ لَأَجْرًا غَيْرَ مَمْنُونٍۢ
और तुम्हारे वास्ते यक़ीनन वह अज्र है जो कभी ख़त्म ही न होगा
وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍۢ
और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं
فَسَتُبْصِرُ وَيُبْصِرُونَ
तो अनक़रीब ही तुम भी देखोगे और ये कुफ्फ़ार भी देख लेंगे
بِأَييِّكُمُ ٱلْمَفْتُونُ
कि तुममें दीवाना कौन है
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِٱلْمُهْتَدِينَ
बेशक तुम्हारा परवरदिगार इनसे ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी राह से भटके हुए हैं और वही हिदायत याफ्ता लोगों को भी ख़ूब जानता है
فَلَا تُطِعِ ٱلْمُكَذِّبِينَ
तो तुम झुठलाने वालों का कहना न मानना
وَدُّوا۟ لَوْ تُدْهِنُ فَيُدْهِنُونَ
वह लोग ये चाहते हैं कि अगर तुम नरमी एख्तेयार करो तो वह भी नरम हो जाएँ
وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍۢ مَّهِينٍ
और तुम (कहीं) ऐसे के कहने में न आना जो बहुत क़समें खाता ज़लील औक़ात ऐबजू
هَمَّازٍۢ مَّشَّآءٍۭ بِنَمِيمٍۢ
जो आला दर्जे का चुग़लख़ोर माल का बहुत बख़ील
مَّنَّاعٍۢ لِّلْخَيْرِ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ
हद से बढ़ने वाला गुनेहगार तुन्द मिजाज़
عُتُلٍّۭ بَعْدَ ذَٰلِكَ زَنِيمٍ
और उसके अलावा बदज़ात (हरमज़ादा) भी है
أَن كَانَ ذَا مَالٍۢ وَبَنِينَ
चूँकि माल बहुत से बेटे रखता है
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो बोल उठता है कि ये तो अगलों के अफ़साने हैं
سَنَسِمُهُۥ عَلَى ٱلْخُرْطُومِ
हम अनक़रीब इसकी नाक पर दाग़ लगाएँगे
إِنَّا بَلَوْنَٰهُمْ كَمَا بَلَوْنَآ أَصْحَٰبَ ٱلْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا۟ لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ
जिस तरह हमने एक बाग़ वालों का इम्तेहान लिया था उसी तरह उनका इम्तेहान लिया जब उन्होने क़समें खा खाकर कहा कि सुबह होते हम उसका मेवा ज़रूर तोड़ डालेंगे
وَلَا يَسْتَثْنُونَ
और इन्शाअल्लाह न कहा
فَطَافَ عَلَيْهَا طَآئِفٌۭ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَآئِمُونَ
तो ये लोग पड़े सो ही रहे थे कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (रातों रात) एक बला चक्कर लगा गयी
فَأَصْبَحَتْ كَٱلصَّرِيمِ
तो वह (सारा बाग़ जलकर) ऐसा हो गया जैसे बहुत काली रात
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