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19 Ayahs • Meccan
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ
(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया
خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِنْ عَلَقٍ
उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो
ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ
और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है
ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ
जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी
عَلَّمَ ٱلْإِنسَٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَيَطْغَىٰٓ
सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ
तो सरकश हो जाता है
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ
जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है
أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ
भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे
أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ
(तो रोकना कैसा)
أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ
भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ
(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ
देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
نَاصِيَةٍۢ كَٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ
झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)