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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ مَا أَمْسَى بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ، فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْرُ
अल्लाहुम्मा मा अमसा बी मिन् निअ-मतिन औ बि-अहदिम्-मिन् खल्क़िक फ़-मिन्क वह्दक ला शरीक लक, फ़-लकल-हम्दु व लकश-शुक्र.
ऐ अल्लाह, जो नेमत आज शाम मुझे या तेरी मखलूक में से किसी को मिली है, वह सिर्फ तेरी तरफ से है, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नहीं, सो तेरे ही लिए सब तारीफ है और तेरे ही लिए सब शुक्र है।
Reference: हसन (इब्न हजर)। नताइजुल अफ़कार: २/३८०