Loading...
Language: Hindi
सुबह (और शाम) को कहें,
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَ فِي دِينِيْ وَدُنْيَايَ وَأَهْلِيْ، وَمَالِيْ، اَللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِيْ، وَآمِنْ رَوْعَاتِيْ، اَللَّهُمَّ احْفَظْنِي مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ وَمِنْ خَلْفِي وَعَنْ يَمِيْنِيْ وَعَنْ شِمَالِي وَمِنْ فَوْقِيْ وَأَعُوْذُ بِعَظَمَتِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِيْ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्-अलुकल-'अफ़्वा वल-'आफ़ियता फ़िद्-दुन्या वल-आख़िराह, अल्लाहुम्मा इन्नी अस्-अलुकल-'अफ़्वा वल-'आफ़ियता फ़ी दीनी व दुन्या-य व अह्लि, व माली, अल्लाहुम्मा-स्तुर 'औराती, व 'आमिन रौ-'आति, अल्लाहुम्माह-फ़ज़नी मिम-बैनी यदय्या, व मिन ख़ल्फ़ी, व 'अन यमीनी, व 'अन शिमाली, व मिन फ़ौक़ी, व अऊज़ू बि-'अज़मतिका अन उग़-ताला मिन तहती।
ए अल्लाह, मैं तुझसे दुनिया और आखिरत में माफी और सलामती (आफियत) मांगता हूँ। ए अल्लाह, मैं तुझसे अपने दीन और दुनिया के मामलों, और अपने परिवार और अपने माल में माफी और सलामती मांगता हूँ। ए अल्लाह, मेरी कमियों को छिपा ले और मेरी घबराहट को सुकून में बदल दे। ए अल्लाह, मेरे सामने से और मेरे पीछे से और मेरे दाहिने से और मेरे बाएं से और मेरे ऊपर से मेरी हिफाज़त कर, और मैं तेरी बड़ाई की पनाह मांगता हूँ कि मैं अपने नीचे से (ज़मीन में) धंसा दिया जाऊं। अब्दुल्ला इब्न उमर (रज़ि.) ने कहा कि, अल्लाह के रसूल (ﷺ) शाम और सुबह में इन दुआओं को कहना कभी नहीं भूलते थे।
Reference: सहीह (अल्बानी)। अबू दाऊद: ५०૭४