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Language: Hindi
यह दुआ मसनून ज़िक्र का एक विशेष ज़िक्र माना जाता है-
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ، وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ
ला इलाहा इल्लाल्लाहु वह-दहू ला शरीका लहू, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा 'अला कुल्ली शय-इन क़दीर।
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक (साझीदार) नहीं, उसी की बादशाही है और उसी के लिए सब तारीफ है, और वह हर चीज़ पर कादिर (सामर्थ्यवान) है। इस ज़िक्र के फायदे के बारे में कई हदीसें बयान की गई हैं। कई प्रामाणिक रिपोर्टों ने हमें आदेश दिया है कि इस दुआ को हर सुबह और शाम १ या १० या १०० या २०० बार, हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, और आम तौर पर बिना किसी समय की पाबंदी के पढ़ें।
Reference: बुख़ारी: ३२९३