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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ إِنَّكَ خَلَقْتَ نَفْسِي وَأَنْتَ تَوَفَّاهَا، لَكَ مَمَاتُهَا وَمَحْيَاهَا، إِنْ أَحْيَيْتَهَا فَاحْفَظْهَا، وَإِنْ أَمَتَّهَا فَاغْفِرْ لَهَا، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ
अल्लाहुम्मा 'इन्नका खलक-त नफ्सी व 'अन्ता त-वफ्फाहा, लका ममातुहा व मह्याहा, 'इन 'अहयय-तहा फह-फज़हा, व 'इन 'अमत्तहा फग-फिर लहा। अल्लाहुम्मा 'इन्नी 'अस-अलुकल-'आफियाह
ए अल्लाह, बेशक तूने मेरी रूह पैदा की है और तू ही उसे वापस लेगा, उसका मरना और जीना तेरे ही लिए है। अगर तू मेरी रूह को ज़िंदा रखे तो उसकी हिफाज़त कर, और अगर तू उसे मौत दे तो उसे बख्श दे। ए अल्लाह, मैं तुझसे अच्छी सेहत मांगता हूँ।
Reference: मुस्लिम: २૭१२