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Language: Hindi
शहर बिन हौशब (रज़ि.) ने कहा: मैंने उम्म सलमा (रज़ि.) से कहा: 'ऐ ईमान वालों की माँ! जब अल्लाह के रसूल (ﷺ) आपके साथ होते थे तो वह कौन सी दुआ सबसे ज़्यादा पढ़ते थे?' उन्होंने कहा: 'वह दुआ जो वह सबसे ज़्यादा कहते थे वह थी -
يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِيْ عَلَى دِيْنِكَ
या मुक़ल्लिबल-कुलूबि, सब्बित क़ल्बी अला दीनिक
ऐ दिलों को पलटने वाले! मेरे दिल को अपने दीन पर जमा दे। तो मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल (ﷺ), आप इतनी कसरत से दुआ क्यों करते हैं? उन्होंने कहा: 'ऐ उम्म सलमा! बेशक, कोई भी इंसान ऐसा नहीं है सिवाय इसके कि उसका दिल अल्लाह की उंगलियों में से दो उंगलियों के बीच है, तो जिसे वह चाहता है उसे साबित क़दम रखता है, और जिसे वह चाहता है उसे गुमराह कर देता है।
Reference: सहीह (अल्बानी)। तिर्मिज़ी: ३५२२