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Language: Hindi
سُبْحَانَكَ اَللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ، أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتُوْبُ إِلَيْكَ
सुब्हानका अल्लाहुम्मा व बिहमदिका, 'अश-हदु 'अन ला 'इलाहा 'इल्ला 'अन्त, 'अस्तगफ़िरुका व 'अतूबु 'इलय्क
तेरी ज़ात पाक है ए अल्लाह, और तारीफ तेरे ही लिए है; मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। मैं तुझसे माफी मांगता हूँ और और तेरी तरफ तौबा करता हूँ। अबू सईद (र.अ) ने कहा, रसूलुल्लाह (ﷺ) ने कहा, अगर कोई वज़ू के बाद यह दुआ कहता है, तो इसे एक पत्र में लिखा जाएगा और मुहरबंद (सिंहासन के नीचे) किया जाएगा। वह मुहर कयामत से पहले नहीं टूटेगी।
Reference: अन-नसाई, अमलुल-यौम वल-लैलह, पृ. १૭३। इसके अलावा देखें अल-अल्बानी, इरवाउल-गलील १/१३५ और २/९४।