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Language: Hindi
When the Mu'adhdhin gave the call to prayer, the Prophet (ﷺ) used to go out for the prayer while reciting this supplication -
اَللَّهُمَّ اجْعَلْ فِي قَلْبِيْ نُوْرًا وَّفِي لِسَانِىْ نُوْرًا وَّاجْعَلْ فِي سَمْعِىْ نُوْرًا وَّاجْعَلْ فِي بَصَرِىْ نُوْرًا وَّاجْعَلْ مِنْ خَلْفِي نُوْرًا وَّمِنْ أَمَامِيْ نُوْرًا وَّاجْعَلْ مِنْ فَوْقِىْ نُوْرًا وَّمِنْ تَحْتِىْ نُوْرًا اَللَّهُمَّ أَعْطِنِىْ نُوْرًا
अल्लाहुम्मा-ज'अल फी कल्बी नूरन, व फी लिसानी नूरन, वज'अल फी समई नूरन, वज'अल फी बसरी नूरन, वज'अल मिन खलफी नूरन, वमिन अरामामी नूरन, वज'अल मिन फौकी नूरन, व मिन तहती नूरन, अल्लाहुम्मा अ'तिनी नूरन
ए अल्लाह, मेरे दिल में नूर पैदा कर, और मेरी जुबान पर नूर, और मेरे कानों में नूर, और मेरी क्या में नूर, और मेरे पीछे नूर कर दे, और मेरे आगे नूर, और मेरे ऊपर नूर, और मेरे नीचे नूर। ए अल्लाह, मुझे नूर प्रदान कर।
Reference: बुख़ारी: ६३१६