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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) कहा करते थे -
اَللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِيَ الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي، وَأَصْلِحْ لِي دُنْيَايَ الَّتِي فِيهَا مَعَاشِي، وَأَصْلِحْ لِي آخِرَتِي الَّتِي فِيهَا مَعَادِي، وَاجْعَلِ الْحَيَاةَ زِيَادَةً لِي فِي كُلِّ خَيْرٍ، وَاجْعَلِ الْمَوْتَ رَاحَةً لِي مِنْ كُلِّ شَرٍّ
अल्लाहुम्मा अस्लिह ली दीनी अल्लज़ी हुवा इस्मतु अमरी, व अस्लिह ली दुनिया-यल्लती फ़ीहा म-आशी, व अस्लिह ली आख़िरति अल्लती फ़ीहा म-आदी, वज-अलिल हयाता ज़ियादतन ली फ़ी कुल्लि खैर, वज-अलिल-मौता राहतन ली मिन कुल्लि शर्र
ऐ अल्लाह, मेरे लिए मेरे दीन को संवार दे जो मेरे मामले का बचाव है, और मेरे लिए मेरी दुनिया को संवार दे जिसमें मेरा जीवन (रोजी) है, और मेरे लिए मेरी आख़िरत को संवार दे जिसमें मेरी वापसी है। और मेरे लिए जीवन को हर भलाई में वृद्धि का कारण बना, और मेरे लिए मौत को हर बुराई से राहत बना।
Reference: मुस्लिम: २૭२०