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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ أَنْتَ الْمَلِكُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، أَنْتَ رَبِّي وَأَنَا عَبْدُكَ، ظَلَمْتُ نَفْسِي وَاعْتَرَفْتُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي ذُنُوبِي جَمِيعًا إِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، وَاهْدِنِي لِأَحْسَنِ الْأَخْلَاقِ لَا يَهْدِي لِأَحْسَنِهَا إِلَّا أَنْتَ، وَاصْرِفْ عَنِّي سَيِّئَهَا، لَا يَصْرِفُ عَنِّي سَيِّئَهَا إِلاَّ أَنْتَ.
अल्लाहुम्मा अन्तल-मलिकु ला इलाहा इल्ला अन्त। अन्त रब्बी व-अना 'अब्दुका, ज़लम्तु नफ़्सी व'तरफ़्तु बिज़न्बी फ़ग़फ़िर ली ज़ुनूबी जमी'अन इन्नहु ला यग़फ़िरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अन्त। वहदिनी लि-अहसनिल-अख़लाक़ि ला यहदी लि-अहसनिहा इल्ला अन्त, वस्रिफ़ 'अन्नी सय्यि-अहा ला यसरिफ़ु 'अन्नी सय्यि-अहा इल्ला अन्त
ए अल्लाह, तू ही बादशाह है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तू मेरा रब है और मैं तेरा बंदा हूँ, मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया और अपने गुनाह का इकरार किया, बस मेरे तमाम गुनाह माफ़ कर दे क्योंकि तेरे सिवा गुनाहों को कोई माफ़ नहीं करता। और मुझे बेहतरीन अख़लाक़ (चरित्र) की हिदायत दे, क्योंकि तेरे सिवा इसकी हिदायत कोई नहीं दे सकता, और मुझसे बुरे अख़लाक़ को फेर दे, क्योंकि तेरे सिवा उसे कोई नहीं फेर सकता।
Reference: मुस्लिम: ૭૭१