Loading...
Language: Hindi
हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर (रज़ि.) से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (ﷺ) की दुआओं में से एक यह थी -
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ زَوَالِ نِعْمَتِكَ وَتَحَوُّلِ عَافِيَتِكَ وَفُجَاءَةِ نِقْمَتِكَ وَجَمِيعِ سَخَطِكَ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन ज़वालि निअ-मतिक, व तहव्वुलि आफ़ियतिक, व फुजा-अति निक़मतिक, व जमी-इ सख़तिक
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह मांगता हूँ तेरी नेमतों के छिन जाने से, और तेरी (दी हुई) आफ़ियत (सुरक्षा) के बदल जाने से, और तेरे अचानक अज़ाब (या नाराजगी) से, और तेरे हर प्रकार के क्रोध से।
Reference: मुस्लिम: २૭३९