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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ مِلْءَ السَّمَوَاتِ وَمِلْءَ الْأَرْضِ وَمِلْءَ مَا بَيْنَهُمَا وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيْءٍ بَعْدُ
अल्ला-युम्मा रब्बना लकल 'हमदु मिल-अस समवाती वा मिल-अल अर्दि वा मिल-आ मा बैना हुमा, वा मिल-आ मा शि'ता मिन शयिन बा'दु
प्रशंसा हो तेरी, ए अल्लाह, हम सब के रब! प्रशंसा हो तेरी, यह आसमानों को भर देती है, पृथ्वी को भर देती है, जो उनके बीच में है उसे पूरा करती है, और फिर यह उसे पूरा करती है जो तू चाहे। इब्न अबी औफ़ा (र), इब्न अब्बास (र.अ), अली (र.अ) और अन्य साथियों ने कहा कि पैगंबर (ﷺ) रुकू से खड़े होने पर ये शब्द कहते थे।
Reference: मुस्लिम: ४૭६