Loading...
Language: Hindi
اَللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ مِلْءَ السَّمَوَاتِ وَمِلْءَ الْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمِلْءَ مَا شِئْتَ مِنْ شَيءٍ بَعْدُ أَهْلَ الثَّنَاءِ وَالْمَجْدِ، لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
अल्लाहुम्मा, रब्बना लकल 'हमदु, मिल-अस समवाती वा मिल-अल अर्दि वमा बैनाहुमा, वा मिल-आ मा शि'ता मिन शयिन बा'दु, अहलथ सनाई वल मज्दि। ला- मानि'अ लिमा अतैता, वला मुत'इया लिमा मन'ता, वला यनफ़'उ ज़ल जद्दी मिनकल जद्दु
अल्लाह! हमारे रब, तेरे लिए प्रशंसा हो जो आकाश और पृथ्वी को भर देगी और जो उनके बीच है, और जो (उनके) अलावा तुझे खुश करेगी। तू ही सारी प्रशंसा और महिमा के योग्य है। कोई भी उसे रोक नहीं सकता जो तू देता है, या उसे दे सकता है जो तू रोकता है। और महानता ए! महान तेरे खिलाफ लाभ नहीं उठाता।
Reference: मुस्लिम: ४૭८