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Language: Hindi
अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है: अल्लाह के रसूल (ﷺ) आपदा के कठिन क्षण और विनाश से घिर जाने और बुरे अंत के लिए किस्मत में लिखे होने, और दुश्मनों की द्वेषपूर्ण खुशी से अल्लाह की पनाह मांगते थे।
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-हममि वल-हज़नि, वल-अज्ज़ि वल-कसलि, वल-बुख़लि वल-जुब्नि, व ज़ल-इद्-दैनी व ग़लबतिर्-रिजाल
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ फ़िक्र और ग़म से, कमज़ोरी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, कर्ज़ के बोझ से और लोगों के दबाव (या गलबे) से।
Reference: बुख़ारी: २८९३