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Language: Hindi
अबू हुरैरा (र.अ) ने कहा: अल्लाह के रसूल (ﷺ) साष्टांग प्रणाम में कहते थे:
اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِيْ كُلَّهُ دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، وَعَلَانِيَّتَهُ وَسِرَّهُ
अल्लाहुम-मग्फिर ली ज़म्बी कुल्लहु, दिक्कहु व जिल्लहु, व 'अव्वलहु व 'आखिरहु व 'अला-निय्यतहु व सिर्रहु
ए अल्लाह, मेरे सभी पापों को माफ कर दे, महान और छोटे, पहले और आखिरी, वे जो ज़ाहिर हैं और वे जो छिपे हुए हैं।
Reference: मुस्लिम: ४८३