Loading...
Language: Hindi
आयशा (र.अ) ने कहा, मुझे एक रात बिस्तर पर रसूलुल्लाह (ﷺ) नहीं मिले। (अंधेरे में) मैंने उन्हें खोजा। फिर मेरे हाथ ने उनके पैर के तलवे को छू लिया। वह तब साष्टांग प्रणाम में थे और उनके पैर सीधे थे। वह कह रहे थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ، وَبِمُعَافَاتِكَ مِنْ عُقُوبَتِكَ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْكَ، لَا أُحْصِيْ ثَنَاءً عَلَيْكَ، أَنْتَ كَمَا أَثْنَيْتَ عَلَى نَفْسِكَ
अल्लाहुम्मा 'इन्नी 'अ'उज़ु बि रिज़ाका मिन सख़तिक, व बिमु'आफ़ातिका मिन 'उक़ूबतिक व 'अ'उज़ु बिका मिन्का, ला 'उहसी सना'अन 'अलैका, 'अन्ता कमा 'अस्नैता 'अला नफ़्सिक
ए अल्लाह, मैं तेरे गुस्से से तेरी रज़ा में सुरक्षा मांगता हूँ, और मैं तेरी सज़ा से तेरी माफ़ी में सुरक्षा मांगता हूँ। मैं तुझसे तुझमें (तेरे गुस्से से) पनाह मांगता हूँ। मैं तेरी तारीफें नहीं गिन सकता। तू वैसा ही है जैसा तूने खुद अपनी तारीफ की है।
Reference: मुस्लिम: ४८६, सहीह (अल्बानी)। तिर्मिज़ी: ३५६६