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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) साष्टांग प्रणाम करते और कहते:
اَللَّهُمَّ لَكَ سَجَدْتُ وَلَكَ أَسْلَمْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، سَجَدَ وَجْهِيَ لِلَّذِي خَلَقَهُ، وَصَوَّرَهُ، فَأَحْسَنَ صُوْرَتَهُ وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ، تَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ
अल्लाहुम्मा लका सजदतु व लका 'असलमतु, व बिका 'आमन्तु सजदा वज्हिया लिल्लज़ी ख़लक़हू, व सव्वरहु फ़'अह्सना सु-रतहू, व शक़्क़ा सम'अहू व बसरहू, तबारकल्लाहु 'अह्सनुल-ख़ालिकीन
ए अल्लाह, मैं तेरे सामने साष्टांग प्रणाम करता हूँ, मैंने तेरे सामने समर्पण कर दिया है, और मुझ पर मुझे विश्वास है। मेरा चेहरा उस व्यक्ति के सामने साष्टांग प्रणाम है जिसने इसे बनाया, इसे गढ़ा, और इसे सुनवाई और दृष्टि दी। धन्य है अल्लाह, रचनाकारों में सबसे अच्छा।
Reference: सहीह (अल्बानी)। नसाई: ११२६