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Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) ने साष्टांग प्रणाम की आयत पढ़ी और सुजूद में गए और यह दुआ की:
اَللَّهُمَّ اكْتُبْ لِي بِهَا عِنْدَكَ أَجْرًا، وَضَعْ عَنِّي بِهَا وِزْرًا، وَاجْعَلْهَا لِي عِنْدَكَ ذُخْرًا، وَتَقَبَّلْهَا مِنِّي كَمَا تَقَبَّلْتَهَا مِنْ عَبْدِكَ دَاوُدَ
अल्लाहुम-मक्तुब ली बिहा 'इन्दका 'अजरन, वदा', 'अन्नी बिहा विज़रन, वज'अलहा ली 'इन्दका ज़ुख़रन, व तक़ब्बलहा मिन्नी कमा तक़ब्बलतहा मिन 'अब्दिका दाऊद
ए अल्लाह, इसे मेरे लिए इनाम के रूप में लिख, और इसके लिए मुझे पाप से मुक्त कर, और इसे मेरे लिए स्वर्ग में खज़ाना बना। इसे मुझसे स्वीकार कर जैसा कि तूने अपने सेवक दाऊद से इसे स्वीकार किया था।
Reference: हसन (अल्बानी)। तिर्मिज़ी: ५૭९