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Language: Hindi
अबू बक्र अस-सिद्दीक (र.अ) द्वारा वर्णित: मैंने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से मुझे एक दुआ सिखाने के लिए कहा ताकि मैं अपनी नमाज़ में अल्लाह से दुआ कर सकूँ। उन्होंने मुझे कहने के लिए कहा:
اَللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِيْ ظُلْمًا كَثِيْرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِيْ إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ्सी ज़ुल्मन कसीरन, व ला यग्फिरुज़-ज़ुनूबा 'इल्ला 'अन्त, फग्फिर ली मगफिरतन मिन 'इन्दिका वरहमनी 'इन्नका 'अन्तल-गफूरुर-रहीम
ए अल्लाह, मैंने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया है और तेरे सिवा कोई गुनाह माफ नहीं करता। तो मुझे अपनी तरफ से माफी अता कर और मुझ पर रहम कर। बेशक तू ही माफ करने वाला, रहम करने वाला है।
Reference: बुख़ारी: ८३४