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Language: Hindi
मिज़ान इब्न अरदा (र.अ) द्वारा वर्णित: अल्लाह के रसूल (ﷺ) मस्जिद में दाखिल हुए। तब एक व्यक्ति प्रार्थना के अंत की ओर तशहहुद पढ़ रहा था। वह कहता है:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا أَللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ، أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوبِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस'अलुका या अल्लाहु बि'अन्नकल-वाहिदुल-'अहदुस-समदुल-लज़ी, लम यलिद व लम यूलद, व लम यकुन लहु कुफुवन 'अहद, अन तग्फिर ली ज़ुनूबी इन्नका अन्तत-गफूरुर-रहीम
ए अल्लाह, मैं तुझसे सवाल करता हूँ। ए अल्लाह, तू एक है, अकेला है, बेनियाज़ है, न उसने किसी को जन्म दिया और न वह किसी से जन्मा है और कोई उसके बराबर नहीं है। मेरे गुनाहों को माफ कर दे, बेशक तू माफ करने वाला, रहम करने वाला है। उसकी दुआ सुनने के बाद, अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने तीन बार कहा, "उसे माफ कर दिया गया है।"
Reference: सहीह (अल्बानी)। नसाई: १३०१