Loading...
Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद यह दुआ कहते थे:
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، اَللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِىَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
ला इलाहा इल्ल-अल्लाहु वहदहु ला शरीक लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हुव ‛अला कुल्लि शयइन कदीर, अल्लाहुम्मा ला मानि‛अ लि मा अ‛तयता, व ला मु‛तिय लि मा मन‛ता व ला यन्फ‛उ ज़ल-जद्दि मिन्कल-जद्द
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए मुल्क (बादशाही) है और उसी के लिए सारी तारीफ है और वह हर चीज़ पर कादिर है। ए अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं, और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी बड़े की बड़ाई तेरे सामने उसे कोई फायदा नहीं दे सकती (क्योंकि सारी बड़ाई तेरी ही तरफ से है)।
Reference: बुख़ारी: ८४४