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Language: Hindi
सुहैब (र.अ) ने कहा: पैगंबर (ﷺ) प्रार्थना के अंत में यह दुआ कहते थे:
اَللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِيْنِيَ الَّذِي جَعَلْتَهُ عِصْمَةَ أَمْرِي، وَأَصْلِحْ لِي دُنْيَايَ الَّتِي جَعَلْتَ فِيهَا مَعَاشِيْ، اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِرِضَاكَ مِنْ سَخَطِكَ، وَبِعَفْوِكَ مِنْ نِقْمَتِكَ، وَأَعُودُ بِكَ مِنْكَ، اَللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلَا مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلَا يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الْجَدُّ
अल्लाहुम्मा अस्लिह ली दीन्या-ल्लज़ी ज'अल्तहु इस्मता अमरी, व अस्लिह ली दुनियाय-ल्लती ज'अल्ता फीहा मआशी, अल्लाहुम्मा इन्नी अ-ऊज़ु बिरिज़ाका मिन सखतिका, वबि 'अफ़विका मिन निकमतिका, व अ-ऊज़ु बिका मिन्का, अल्लाहुम्मा ला मानि'अ लिमा अ'तयता व ला मु'तिय लिमा मन'ता व ला यन्फ'उ ज़ल-जद्दि मिन्कल-जद्द
ए अल्लाह, मेरे दीन को ठीक कर जिसे तूने मेरे लिए हिफाज़त बनाया है, और मेरी दुनिया को ठीक कर जिसमें तूने मेरी आजीविका बनाई है। ए अल्लाह, मैं तेरे गुस्से से तेरी रज़ा की पनाह मांगता हूं, और तेरी सज़ा से तेरे अफ़्व (माफ़ी) की पनाह मांगता हूं, और मैं तुझसे तेरी पनाह मांगता हूं। ए अल्लाह, जो तूने दिया उसे कोई रोक नहीं सकता और जो तूने रोक लिया उसे कोई दे नहीं सकता, और कोई भी दौलत या किस्मत वाला तेरी रज़ा के बिना फायदा नहीं उठा सकता।
Reference: हसन (इब्न हजर)। अल-फ़ुतुहातुर रब्बानिय्याह ३/૭१