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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِيْ وَوَسِّعْ لِي فِي دَارِيْ وَبَارِكْ لِي فِي رِزْقِيْ
अल्लाहुम्मग़फिर ली ज़न्बी, व वस्सि' ली फी दारी, व बारिक ली फी रिज़्की
ए अल्लाह, मेरे गुनाह माफ़ कर, और मेरे घर में कुशादगी (विस्तार) कर, और मेरे लिए उसमें बरकत दे जो तूने मुझे प्रदान किया है।
Reference: हसन (अल्बानी)। सहीह अल जामी: १२६५