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Language: Hindi
सूरह इखलास १० बार:
بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ قُلْ هُوَ اللَّـهُ أَحَدٌ ﴿١﴾ اللَّـهُ الصَّمَدُ ﴿٢﴾ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿٣﴾ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ ﴿٤﴾
बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम। (१) कुल हुवल्लाहु अहद। (२) अल्लाहुस-समद। (३) लम यलिद व लम यूलद। (४) व लम यकुल्लहू कुफ़ुवन अहद
अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है। (१) कह दो: वह (अल्लाह) एक है। (२) अल्लाह बेनियाज़ है (सब उसके मोहताज हैं, वह किसी का मोहताज नहीं)। (३) न उस की कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है। (४) और उसके बराबर का कोई नहीं। (सूरह इखलास: १-४) एक सहीह हदीस में, मुआज़ इब्न अनस (रज़ि.) ने कहा: अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने कहा: जो कोई सूरह इखलास १० बार पढ़ता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत में एक घर बनाएगा।
Reference: सहीह (अल्बानी)। सहीह अल जामी: ६४૭२