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Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) जनाज़ा की नमाज़ में कहते थे:
اَللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَصَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا وَذَكَرِنَا وَأُنْثَانَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا اَللَّهُمَّ مَنْ أَحْيَيْتَهُ مِنَّا فَأَحْيِهِ عَلَى الْإِيمَانِ وَمَنْ تَوَفَّيْتَهُ مِنَّا فَتَوَفَّهُ عَلَى الْإِسْلَامِ اَللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا أَجْرَهُ وَلَا تُضِلَّنَا بَعْدَهُ
अल्लाहुम-मगफिर लिहय्यिना, व मय्यितिना, व सगीरिना व कबीरिना, व ज़करिना व 'उन्साना, व शाहिदिना, व गा'इबिना। अल्लाहुम्मा मन 'अहय्यतहु मिन्ना फ'अहयिहि 'अलल-'ईमान, व मन तवफ्फयतहु मिन्ना फतवफ्फहु 'अलल-'इस्लाम, अल्लाहुम्मा ला तहरिमना 'अज्रहु व ला तुज़िल्लना बा'दहु
ऐ अल्लाह, हममें से जो जीवित हैं और जो मर चुके हैं, जो उपस्थित हैं और जो अनुपस्थित हैं, हमारे छोटे और हमारे बड़े, हमारे पुरुष और हमारी महिलाओं को माफ कर दे। ऐ अल्लाह, हममें से जिसे तू जीवन दे उसे एक मोमिन (ईमान वाला) के रूप में जीवन दे, और हममें से जिसे तू मौत दे उसे इस्लाम के अनुयायी के रूप में मौत दे। ऐ अल्लाह, हमें उसके (ईमान के) इनाम से वंचित न कर और उसकी मौत के बाद हमें गुमराह न कर।
Reference: सहीह (अल्बानी)। अबू दाऊद: ३२०१