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Language: Hindi
वसीला इब्न अल-अस्का (रज़ि.) के अधिकार पर यह रिवायत है कि उन्होंने कहा, 'अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने हमारे साथ एक मुस्लिम व्यक्ति का जनाज़ा किया। वहाँ मैंने उन्हें कहते सुना -
اَللَّهُمَّ إِنَّ (فُلَانَ بْنَ فُلَانٍ) فِي ذِمَّتِكَ وَحَبْلِ جِوَارِكَ فَقِهِ مِنْ فِتْنَةِ الْقَبْرِ وَعَذَابِ النَّارِ وَأَنْتَ أَهْلُ الْوَفَاءِ وَالْحَقِّ اَللَّهُمَّ فَاغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ
अल्लाहुम्मा 'इन्ना (फुला-नब्ना फुलान) फी ज़िम्मतिका, व हबली जिवा-रिका, फकिही मिन फितनतिल-कब्रि व 'अज़ाबिन-नारि, व 'अन्ता 'अहलुल-वफा'इ वलहक्क। अल्लाहुम्मा फगफिर लहु वरहमहु 'इन्नका 'अन्तल-गफूरुर-रहीम।
ए अल्लाह, बेशक [व्यक्ति का नाम लें] तेरी पनाह में है, और तेरी सुरक्षा की रस्सी में है, तो उसे कब्र की आज़माइश और आग के अज़ाब से बचा। तू वादे पूरे करता है और अधिकार देता है, तो उसे माफ़ कर और उस पर रहम कर। बेशक तू सबसे ज़्यादा माफ़ करने वाला, सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है।
Reference: सहीह. अबू दाऊद: ३२०२