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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ أَمَتُكَ وَبِنْتُ أَمَتِكَ اِحْتَاجَتْ إِلَى رَحْمَتِكَ، وَأَنْتَ غَنِيٌّ عَنْ عَذَابِهَا، إِنْ كَانَتْ مُحْسِنَةً فَزِدْ فِي حَسَنَاتِهَا، وَإِنْ كَانَتْ مُسِيئَةً فَتَجَاوَزْ عَنْهَا
अल्लाहुम्मा 'अमतुका वबिन्तु 'अमतिका, एहताजत इला रहमतिका, व अन्ता गनिय्युन 'अन 'अज़ाबिहा, इन कानत मु'हसिनतन फज़िद फी 'हसनातिहा, व इन कानत मुसी'अतन फ तजावज़ 'अनहा
ए अल्लाह, वह तेरी बांदी है और तेरी बांदी की बेटी है, उसे तेरी रहम की ज़रूरत है, और तू उसकी सज़ा से बेनियाज़ है। अगर वह नेक काम करने वाली है, तो उसकी नेकी बढ़ा। और अगर उसने गुनाह किया है, तो उसे माफ़ कर।
Reference: सहीह (अल्बानी)। अल-हाकिम: १/३५९