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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ إِنَّ (فُلَانَةَ بِنْتُ فُلَانٍ) فِي ذِمَّتِكَ وَحَبْلِ جِوَارِكَ فَقِهِ مِنْ فِتْنَةِ الْقَبْرِ وَعَذَابِ النَّارِ وَأَنْتَ أَهْلُ الْوَفَاءِ وَالْحَقِّ، اَللَّهُمَّ فَاغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُوْرُ الرَّحِيْمُ
अल्लाहुम्मा 'इन्ना (फुला-नता बिन्तु फुलान) फी ज़िम्मतिका, व हबली जिवा-रिका, फकिही मिन फितनतिल-कब्रि व 'अज़ाबिन-नारि, व 'अन्ता 'अहलुल-वफा'इ वलहक्क। अल्लाहुम्मा फगफिर लहा वरहमहा 'इन्नका 'अन्तल-गफूरुर-रहीम
ए अल्लाह, बेशक [व्यक्ति का नाम लें] तेरी पनाह में है, और तेरी सुरक्षा की रस्सी में है, तो उसे कब्र की आज़माइश और आग के अज़ाब से बचा। तू वादे पूरे करता है और अधिकार देता है, तो उसे माफ़ कर और उस पर रहम कर। बेशक तू सबसे ज़्यादा माफ़ करने वाला, सबसे ज़्यादा रहम करने वाला है।
Reference: सहीह. अबू दाऊद: ३२०२