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Language: Hindi
प्रसिद्ध ताबिई हसन बसरी (रज़ि.) बच्चे के जनाज़ा में सूरह फातिहा पढ़ते थे और निम्नलिखित दुआ पढ़ते थे:
اَللَّهُمَّ اجْعَلْهُ لَنَا سَلَفًا وَّفَرَطًا وَّأَجْرًا
अल्लाहुम-मज'अल्ह लना सलफन, व फरतन, व 'अजरन
ए अल्लाह, उसे हमारे लिए एक पूर्वाधिकारी, एक अग्रदूत और इनाम का कारण बना दे।
Reference: मवक़ूफ़ हसन (अल्बानी)। अहकामुल-जनाइज़, पृ. १६०