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Language: Hindi
पैगंबर (ﷺ) अपना रोज़ा खोलते समय कहते थे:
ذَهَبَ الظَّمَاءُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوْقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
ज़हबज़-ज़म'उ वबतल्लतिल-'उरूक, व सबतल-'अजरु 'इन्शा-अल्लाह
प्यास बुझ गई है, नसें तर हो गई हैं और इनाम पक्का हो गया है, अगर अल्लाह ने चाहा।
Reference: [१] हसन (अल्बानी)। अबू दाऊद: २३५૭ [२] ज़ईफ़ (अल्बानी)। अबू दाऊद: २३५८