Loading...
Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ), जब सफर पर होते थे तो यह दुआ पढ़ते थे:
اَللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمُنْقَلَبِ وَسُوءِ الْمَنْظَرِ فِي الْأَهْلِ وَالْمَالِ اَللَّهُمَّ اطْوِ لَنَا الْأَرْضَ وَهَوِّنْ عَلَيْنَا السَّفَرَ
अल्लाहुम्मा अंतस-साहिबु फिस-सफ़रि वल-ख़लीफतु फ़िल-अहलि, अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन व'साइस-सफ़रि, व काअ-बतिल मुन्कलबी व सूइल मंज़रि फ़िल-अहलि वल मालि, अल्लाहुम्-मत्वि लनल-अर्ज़ा व हव्विन अलैन्स-सफ़र
ए अल्लाह, तू सफ़र में साथी है, और परिवार की देखभाल करने वाला है; ए अल्लाह, मैं तुझसे सफ़र की कठिनाई, वापसी पर नुकसान पाने, और अपने परिवार और संपत्ति में आने वाली बुरी चीज़ों को देखने में नाखुशी से तेरी पनाह माँगता हूँ। ए अल्लाह, हमारे लिए उसकी यात्रा की लंबाई कम कर दे, और हमारे लिए यात्रा आसान कर दे।
Reference: हसन सहीह (अल्बानी)। अबू दाऊद: २५९८