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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ), जब सफर पर होते थे तो यह दुआ पढ़ते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ فِي سَفَرِيْ هَذَا مِنَ الْبِرِّ وَالتَّقْوَى وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَى، اَللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا الْمَسِيرَ وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَ الْأَرْضِ اَللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ اَللَّهُمَّ اصْحَبْنَا فِي سَفَرِنَا وَاخْلُفْنَا فِي أَهْلِنَا
अल्लाहुम्मा इन्नी अस’अलुका फी सफरजी हाज़ा मिनल-बिर्री वत-तक्वा, व मिनल-अमल मा तरज़ा। अल्लाहुम्मा हव्विन 'अलैनाल-मसीरा, वत्वि 'अन्ना बु'दल-अर्ज़। अल्लाहुम्मा अंतस-साहिबु फ़िस सफ़रि वल-ख़लीफतु फ़िल-अहलि। अल्लाहुम्मा अस-हबना फ़ी सफ़रिना वख़्लुफ़ना फ़ी अहलिना
ए अल्लाह, मैं तुझसे अपनी इस यात्रा में नेकी और तकवा और ऐसे कार्यों की मांग करता हूं जिनसे तू खुश है। ए अल्लाह, हमारे लिए रास्ता आसान कर दे, और हमारे लिए ज़मीन की दूरी कम कर दे। ए अल्लाह, तू सफ़र में साथी है, और परिवार का रक्षक है। ए अल्लाह, हमारी यात्रा में हमारा साथ दे, और हमारे परिवारों की देखभाल कर।
Reference: सहीह (अल्बानी)। तिर्मिज़ी: ३४४૭