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Language: Hindi
अम्र इब्न शुऐब (रज़ि.) ने अपने पिता के माध्यम से अपने दादा से रिवायत किया, पैगंबर (ﷺ) ने कहा, "सबसे अच्छी दुआ अरफ़ा के दिन की दुआ है। सबसे अच्छी प्रार्थना जो मैंने और मेरे पूर्ववर्तियों ने पढ़ी है वह है -
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हुवा 'अला कुल्लि शय-इन कदीर
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी के लिए सारी बादशाही और तारीफ है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
Reference: यह हदीस हसन है. तिर्मिज़ी, ३५८५