Loading...
Language: Hindi
अल्लाह (SWT) फरमाता है -
إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ ﴿١﴾ وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ ﴿٢﴾ لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ ﴿٣﴾ تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ ﴿٤﴾ سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ ﴿٥﴾
इन्ना अनज़ल्नाहु फी लैलातुल कद्र। व मा अदराका मा लैलातुल कद्र...
(१) बेशक हमने इसे (क़ुरआन को) शब-ए-क़द्र में नाज़िल किया। (२) और आप क्या जानें कि शब-ए-क़द्र क्या है? (३) शब-ए-क़द्र (इबादत के लिए) हज़ार महीनों से बेहतर है। (४) उसमें फ़रिश्ते और रूह (जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर हुक्म लेकर उतरते हैं। (५) वह रात सरापा सलामती है, फज्र के उदय होने तक। (सूरह क़द्र)
Reference: सूरा अल-क़द्र ९૭:१-५