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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِيْ وَأَنَا عَبْدُكَ وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوْذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِيْ فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्मा अंता रब्बी ला इलाहा इल्ला अंता, खलक-तनी व-अना 'अबदुक, व-अना 'अला 'अहदिका व-व'डिका मस-तता'तु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सना'तु, अबू-उ लका बि-नि'मतिका 'अलीया, व-अबू-उ बि-ज़नबी, फग-फिर ली फ-इन्नहु ला यग-फिरुज़ ज़ुनूबा इल्ला अंता
ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है, तेरे सिवा इबादत के लायक कोई नहीं, तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ और मैं अपनी ताक़त के मुताबिक तेरे इकरार और वादे पर कायम हूँ, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ उस बुराई से जो मैंने की है। मैं मुझ पर तेरे एहसान का इकरार करता हूँ और मैं अपने गुनाह का इकरार करता हूँ, इसलिए मुझे माफ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाह माफ नहीं कर सकता।
Reference: बुख़ारी: ६३०६