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Language: Hindi
अल्लाह कहता है:
وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فٰحِشَةً أَوْ ظَلَمُوٓا أَنفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللَّهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ وَمَن يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا اللَّهُ وَلَمْ يُصِرُّوا عَلٰى مَا فَعَلُوا وَهُمْ يَعْلَمُونَ
वल्लज़ीना इज़ा फअलू फाहिशतन औ ज़लमु अनफुसहुम...
और वो लोग जो, जब वे कोई अनैतिकता करते हैं या खुद पर ज़ुल्म करते हैं [उल्लंघन करके], तो अल्लाह को याद करते हैं और अपने पापों के लिए माफी मांगते हैं - और अल्लाह के अलावा कौन पापों को माफ कर सकता है? - और [जो] जानते हुए भी जो उन्होंने किया उस पर कायम नहीं रहते।
Reference: सूरा आले इमरान ३:१३५