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Language: Hindi
जो लोग आखिरी रात में माफ़ी मांगते हैं, उनकी तारीफ़ करते हुए अल्लाह फरमाता है -
كَانُوا قَلِيلًا مِّنَ اللَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ ﴿١٧﴾ وَبِالْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ ﴿١٨﴾
कानू कलीलन मिनल लैली मा यहजऊन। व बिल असहारि हुम यस्तगफिरून
(१७) वे (जन्नती लोग) रात को कम सोते थे, (१८) और सुबह के समय (सहरी/फज्र से पहले) वे माफ़ी मांगते थे। [सूरह अज़-ज़ारियात: १७-१८]
Reference: [१] बुख़ारी: ११४५ [२] सूरा अज़-ज़ारियात: ५१: १૭-१८