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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ مٰلِكَ الْمُلْكِ تُؤْتِي الْمُلْكَ مَنْ تَشَاءُ وَتَنْزِعُ الْمُلْكَ مِمَّنْ تَشَاءُ وَتُعِزُّ مَنْ تَشَاءُ وَتُذِلُّ مَنْ تَشَاءُ بِيَدِكَ الْخَيْرُ إِنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ رَحْمَانُ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَرَحِيْمَهُمَا تُعْطِيْهِمَا مَنْ تَشَاءُ وَتَمْنَعُ مِنْهُمَا مَنْ تَشَاءُ ارْحَمْنِيْ رَحْمَةً تُغْنِيْنِيْ بِهَا عَنْ رَحْمَةِ مَنْ سِوَاكَ
अल्लाहुम्मा मालिक-अल-मुल्कि तु'तिल-मुल्का मन तशा'उ, व तंज़ि'उल-मुल्का मिम्मन तशा'उ, व तु'इज़्ज़ु मन तशा'उ व तुज़िल्लु मन तशा'उ, बियादिक-अल-खैर इन्नका 'अला कुल्लि शय'इन क़दीर, रह मानुद-दुनिया वल-आख़िरति व रहीमुहुमा, तु'तीहिमा मन तशा'उ, व तमन'उ मिन्हुमा मन तशा'उ-र्हमनी रहमतन तुग्नीनी बिहा 'अन रहमति मन सिवाक
हे अल्लाह, उम्मत (या राज्य) के मालिक (और स्वामी), तू जिसे चाहे उम्मत देता है, और जिससे चाहे उम्मत ले लेता है, और जिसे चाहे ऊंचा करता है, और जिसे चाहे अपमानित करता है। तेरे हाथ में सारी भलाई है। वास्तव में, तू सब कुछ करने में सक्षम है। इस दुनिया और आखिरा के दयालु और कृपालु, तू उन्हें जिसे चाहे देता है और जिसे चाहे उनसे रोकता है। मुझ पर दया कर, (ऐसी) दया जो मुझे दूसरों (तेरे अलावा) की दया की आवश्यकता न रखे। अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने मुआज़ (रज़ि.) से कहा, 'अगर तुम यह दुआ करोगे, तो अल्लाह तुम्हें चुका देगा, भले ही तुम्हारे पास पहाड़ जैसा कर्ज हो।
Reference: हसन (अल्बानी)। सहीहुत तरग़ीब: १८२१