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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) नमाज़ में यह दुआ पढ़ते थे:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ، وَأَعُوْذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْـيَا وَالْمَمَاتِ. اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْمَأْثَمِ وَالْمَغْرَمِ
अल्लाहुम्मा इन्नी 'अऊज़ु बिका मिन 'अज़ाबिल-कब्र, व 'अऊज़ु बिका मिन फितनतिल-मसीहिद-दज्जाल, व 'अऊज़ु बिका मिन फितनतिल-मह्या वल-ममात। अल्लाहुम्मा इन्नी 'अऊज़ु बिका मिनल-म'थमी वल-मगरम
ऐ अल्लाह, मैं कब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ, और मैं मसीह दज्जाल के फितने से तेरी पनाह माँगता हूँ, और मैं जीवन और मृत्यु की परीक्षाओं से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं गुनाह और कर्ज से तेरी पनाह माँगता हूँ। किसी ने उनसे (पैगंबर [ﷺ]) पूछा, "आप कर्ज से (अल्लाह से) इतनी पनाह क्यों मांगते हैं?" जवाब में, पैगंबर (ﷺ) ने कहा, "जब कोई व्यक्ति कर्ज में होता है, तो वह झूठ बोलता है जब वह बोलता है और अपना वादा तोड़ता है।
Reference: बुख़ारी: ८३२