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Language: Hindi
The Prophet (ﷺ) used to say:
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوْذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
अल्लाहुम्मा इन्नी 'अऊज़ु बिका मिनल-हम्मी वल-हज़नी, वल-'अज्ज़ि वल-कसली, वल-बुख्लि वल-जुब्नि, व ज़ल'इद-दैनी व ग़लबतिर्-रिजाल
ऐ अल्लाह, मैं दुख और उदासी से, कमजोरी और आलस्य से, कंजूसी और कायरता से, कर्ज के बोझ से और लोगों (यानी दूसरों) द्वारा दबाए जाने से तेरी पनाह मांगता हूँ।
Reference: बुख़ारी: २८९३