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Language: Hindi
Prophet (ﷺ) said, If anyone fears to encounter an enemy or those of authority, then he should say:
اَللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيْمِ كُنْ لِي جَارًا مِنْ فُلَانِ بْنِ فُلَانٍ، وَأَحْزَابِهِ مِنْ خَلَائِقِكَ (وَمِنْ شَرِّ خَلْقِكَ كُلِّهِمْ جَمِيْعًا) أَنْ يَفْرُطَ عَلَيَّ أَحَدٌ مِنْهُمْ أَوْ يَطْغَى عَزَّ جَارُكَ وَجَلَّ ثَنَاؤُكَ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्मा रब्बास-समावातिस-सब'इ, व रब्बाल-अर्शिल-अज़ीम, कुन ली जारन मिन [यहाँ व्यक्ति का नाम लें], व अह्ज़ाबिही मिन खलाइक़िका, (व मिन शर्रि खल्किका कुल्लिहिम जमीअन) अन यफरुता 'अलैय्या अहदुन मिन्हुम औ यतग़ा, 'अज़्ज़ा जारुका, व जल्ला सनाउका, व ला इलाहा इल्ला अंत
ऐ अल्लाह, सात आकाशों के रब, महान सिंहासन के रब, मेरे लिए [अमुक व्यक्ति] और तेरे प्राणियों में से उसके मददगारों के खिलाफ एक सहारा बन जा, ताकि उनमें से कोई भी मेरे खिलाफ ज्यादती न करे या गलत न करे। तेरा संरक्षण शक्तिशाली है और तेरी स्तुति महान है। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है।
Reference: सहीह (अल्बानी)। सहीह अत-तरग़ीब: २२३૭, अदबुल मुफ़रद: ૭०૭