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Language: Hindi
Even if the burden of debt is like a mountain, (if this dua is recited) Allah will forgive the debt:
اَللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
अल्लाहुम्माक-फ़िनी बि-हलालिका 'अन हरामिका, व अग़्निनी बि-फ़ज़्लिका 'अम्मन सिवाक
ऐ अल्लाह, मुझे अपने हलाल (रिज़्क़) के साथ हराम से बचा ले, और अपने फ़ज़्ल (कृपा) से मुझे अपने सिवा किसी और का मोहताज न बना।
Reference: हसन ग़रीब. तिर्मिज़ी: ३५६३