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Language: Hindi
اَللَّهُمَّ رَبَّ جِبْرَائِيْلَ وَمِيْكَائِيْلَ وَإِسْرَافِيلَ فَاطِرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ أَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ اهْدِنِيْ لِمَا اخْتُلِفَ فِيهِ مِنَ الْحَقِّ بِإِذْنِكَ إِنَّكَ تَهْدِيْ مَنْ تَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيْمٍ
अल्लाहुम्मा रब्बा जिबरा-ईल, व मीका-ईल, व इस्राफील फातिरस्-समावति वल-अर्ज़, 'आलिमल-ग़ैबि वश-शहादाह, अन्ता तहकुमु बैना 'इबादिका फीमा कानू फीहि यख़्तलिफून, इह्दिनी लिमुख-तुलिफा फीहि मिनल-हक्क़ि बि-इज़्निका, इन्नका तहदी मन तशा-उ इला सिरातिम मुस्तक़ीम
ऐ अल्लाह, जिब्रईल, मीकाईल और इस्राफील के रब, आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, छिपी और ज़ाहिर बातों के जानने वाले। तू ही अपने बंदों के बीच उस चीज़ का फैसला करता है जिसमें वे मतभेद करते थे। मुझे अपनी आज्ञा से उस सत्य की ओर मार्गदर्शन दे जिसमें वे मतभेद रखते थे, बेशक तू जिसे चाहता है सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन देता है।
Reference: मुस्लिम: ७७०