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Language: Hindi
अल्लाह के रसूल (ﷺ) मस्जिद में दाखिल हुए। तब एक व्यक्ति नमाज़ के अंत में तशहहुद पढ़ रहा था। उसने कहा -
اَللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ يَا اللَّهُ بِأَنَّكَ الْوَاحِدُ الْأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ أَنْ تَغْفِرَ لِي ذُنُوبِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका या अल्लाहु बि-अन्नकल वाहिदुल-अहद उस-समदुल्ल-ज़ी लम यलिद व लम यूलद, व लम यकुन लहू कुफुवन अहद, अन तगफिर-ली धुनूबी, इन्नका अंतल-गफ़ूरुर-रहीम
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे मांगता हूं, ऐ अल्लाह, क्योंकि तू एक है, अकेला है, बेनियाज़ मालिक है, जो न जपा और न ही वह जना गया, और उसके बराबर या तुलना के लायक कोई नहीं है, मेरे गुनाहों को माफ़ कर दे, क्योंकि तू बहुत माफ़ करने वाला, सबसे रहम करने वाला है। अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने कहा: "इसे माफ़ कर दिया गया है," तीन बार।
Reference: सहीह (अल्बानी)। नसाई: १३०१