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Language: Hindi
الم ﴿١﴾ ذَٰلِكَ الْكِتَابُ لَا رَيْبَ ۛ فِيهِ ۛ هُدًى لِّلْمُتَّقِينَ ﴿٢﴾ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ ﴿٣﴾ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِالْآخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ ﴿٤﴾ أُولَـٰئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ ۖ وَأُولَـٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ﴿٥﴾
अलिफ लाम मीम। ज़ालिकल किताबा ला राइबा फीहि...
(१) अलिफ़, लाम, मीम। (२) यह वह किताब है जिसमें कोई शक नहीं, अल्लाह से डरने वालों के लिए हिदायत है - (३) जो गज़ब पर ईमान लाते हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं, (४) और जो उस पर ईमान लाते हैं जो आप (मुहम्मद) पर नाज़िल किया गया, और जो आप से पहले नाज़िल किया गया, और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं। (५) वही अपने रब की तरफ से हिदायत पर हैं, और वही कामयाब हैं।
Reference: सूरा अल-बक़रह २: १-५