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Language: Hindi
شَهِدَ اللَّـهُ أَنَّهُ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ وَالْمَلَائِكَةُ وَأُولُو الْعِلْمِ قَائِمًا بِالْقِسْطِ ۚ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ﴿١٨﴾ إِنَّ الدِّينَ عِندَ اللَّـهِ الْإِسْلَامُ ۗ وَمَا اخْتَلَفَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِآيَاتِ اللَّـهِ فَإِنَّ اللَّـهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ ﴿١٩﴾
शाहिदा अल्लाहु अन्नहू ला इलाहा इल्ला हुवा...
(१८) अल्लाह ने गवाही दी कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं, और फरिश्तों और इल्म वालों ने भी - [कि वह] इंसाफ के साथ कायम है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह ज़बरदस्त (अज़ीज़), हकीम है। (१९) बेशक, अल्लाह के नज़दीक दीन इस्लाम है। और जिन्हें किताब दी गई थी उन्होंने मतभेद नहीं किया मगर इसके बाद कि उनके पास इल्म आ गया - आपस में ईर्ष्या-द्वेष के कारण। और जो अल्लाह की आयतों का इनकार करे, तो बेशक, अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है।
Reference: सूरा आले इमरान ३: १८-१९