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Language: Hindi
أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ ﴿١١٥﴾ فَتَعَالَى اللَّـهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۖ لَا إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ ﴿١١٦﴾ وَمَن يَدْعُ مَعَ اللَّـهِ إِلَـٰهًا آخَرَ لَا بُرْهَانَ لَهُ بِهِ فَإِنَّمَا حِسَابُهُ عِندَ رَبِّهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْكَافِرُونَ ﴿١١٧﴾ وَقُل رَّبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ ﴿١١٨﴾
अफहसिबतुम अन्नमा खलकनाकुम अबसन...
(११५) क्या तुमने यह गुमान किया था कि हमने तुम्हें बेकार पैदा किया है और तुम हमारी तरफ नहीं लौटाए जाओगे?" (११६) तो बहुत आलीशान है अल्लाह, वह बादशाह, वह हक़; उसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं, वह इज़्ज़त वाले अर्श का रब है। (११७) और जो कोई अल्लाह के साथ किसी और माबूद को पुकारता है जिसके लिए उसके पास कोई दलील नहीं है - तो उसका हिसाब उसके रब के पास है। बेशक, का फिर कामयाब नहीं होंगे। (११८) और, [ऐ मुहम्मद], कहो, "ऐ मेरे रब, माफ कर और रहम कर, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।"
Reference: सूरा अल-मुअमिनून २३: ११५-११८