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Language: Hindi
يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ إِنِ اسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا مِنْ أَقْطَارِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ فَانفُذُوا ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَانٍ ﴿٣٣﴾ فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٤﴾ يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِّن نَّارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنتَصِرَانِ ﴿٣٥﴾ فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٦﴾
या मअशरल जिन्नि वल इन्सि इनि इसतततुम...
(३३) ऐ जिन्नों और इंसानों के गिरोह, अगर तुम आसमानों और ज़मीन की सरहदों से, निकल कर भाग सकते हो तो भाग जाओ। तुम ताकत [अल्लाह की] के बिना नहीं भाग सकोगे। (३४) तो तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे? (३५) तुम दोनों पर आग की लपटें और धुआं छोड़ा जाएगा, और तुम अपना बचाव नहीं कर सकोगे। (३६) तो तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
Reference: सूरा अर-रहमान ५५: ३३-३६