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Language: Hindi
إِنَّمَا جَزَاءُ الَّذِينَ يُحَارِبُونَ اللَّـهَ وَرَسُولَهُ وَيَسْعَوْنَ فِي الْأَرْضِ فَسَادًا أَن يُقَتَّلُوا أَوْ يُصَلَّبُوا أَوْ تُقَطَّعَ أَيْدِيهِمْ وَأَرْجُلُهُم مِّنْ خِلَافٍ أَوْ يُنفَوْا مِنَ الْأَرْضِ ۚ ذَٰلِكَ لَهُمْ خِزْيٌ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ ﴿٣٣﴾ إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن قَبْلِ أَن تَقْدِرُوا عَلَيْهِمْ ۖ فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّـهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ﴿٣٤﴾
इन्नमा जज़ाउल लज़ीना युहारिबूनल्लाहा व रसु लहू...
(३३) बेशक, जो अल्लाह और उसके रसूल के खिलाफ जंग करते हैं और ज़मीन में फसाद फैलाने की कोशिश करते हैं, उनकी सज़ा बस यही है कि वे मारे जाएं या सूली पर चढ़ाए जाएं या उनके हाथ और पैर उल्टी दिशाओं से काट दिए जाएं या उन्हें देश निकाला दे दिया जाए। यह उनके लिए दुनिया में रुसवाई है; और आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है, (३४) सिवाय उनके जो तुम्हारे काबू पाने से पहले तौबा कर लें। और जान लो कि अल्लाह बख्शने वाला और रहम करने वाला है।
Reference: सूरा अल-माइदाह ५: ३३-३४